ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री हीरालाल नागर ने विधानसभा में जानकारी दी कि प्रदेश में जले हुए ट्रांसफार्मरों को जल्दी बदलने के लिए डिस्कॉम द्वारा हर सब-डिवीजन स्तर पर एक-एक लिफ्टर की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती की परेशानी से राहत देना है।
मंत्री ने बताया कि अगर किसी कारणवश किसान को खुद अपने स्तर पर ट्रांसफार्मर लाना या ले जाना पड़ता है, तो उसके बदले ₹700 का मानदेय उपभोक्ता के बिजली बिल में समायोजित किया जाएगा। इस व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और भुगतान में किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर विभागीय जांच करवाई जाएगी।
ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया कैसे होगी
डिस्कॉम द्वारा जले ट्रांसफार्मरों को लाने, ले जाने और बदलने की जिम्मेदारी संबंधित लिफ्टर संविदाकार को दी गई है। सामान्य स्थिति में लिफ्टर के जरिए ही ट्रांसफार्मर बदला जाएगा।
कई बार फसल खड़ी होने के कारण किसान 72 घंटे से पहले ट्रांसफार्मर बदलवाना चाहते हैं। ऐसे मामलों में अगर लिफ्टर उपलब्ध न हो या खराब हो, तो किसान खुद परिवहन की व्यवस्था कर सकता है। इसके बदले तय राशि बिल में एडजस्ट कर दी जाएगी।
मुख्य बातें:
- हर सब-डिवीजन में एक लिफ्टर तैनात
- ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी संविदाकार की
- आपात स्थिति में किसान स्वयं परिवहन कर सकता है
- ₹700 का मानदेय बिजली बिल में समायोजित होगा
- अनियमितता पर विभागीय जांच होगी
किसानों को क्या फायदा होगा
इस नई व्यवस्था से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जले ट्रांसफार्मर जल्दी बदले जा सकेंगे। इससे खेतों में सिंचाई और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित नहीं रहेगी। फसल के मौसम में यह सुविधा किसानों के लिए काफी राहत देने वाली है।
