बैल आधारित खेती प्रोत्साहन योजना 2026
राज्य सरकार ने पारंपरिक और जैविक खेती को फिर से बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत किसानों को ट्रैक्टर और भारी मशीनों के बजाय बैलों से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बैलों से खेती करने वाले चयनित किसानों को सालाना 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देना, पारंपरिक कृषि पद्धति को पुनर्जीवित करना और खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
Table of Contents
कालीबाई भील स्कूटी योजना राजस्थान
इस योजना को प्रदेशभर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है और अब तक लगभग 42 हजार किसान इसके लिए आवेदन कर चुके हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि किसान फिर से प्राकृतिक और कम खर्च वाली खेती की ओर लौटना चाहते हैं।
योजना का उद्देश्य क्या है
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि खेती में बैलों के घटते हुए उपयोग को दोबारा बढ़ाया जा सके। आधुनिक मशीनों के कारण जहां खेती महंगी होती जा रही है, वहीं बैल आधारित खेती से लागत भी कम होती है और मिट्टी की जीवंतता भी बनी रहती है। सरकार चाहती है कि किसान रासायनिक खाद और भारी मशीनों पर कम निर्भर रहें और पारंपरिक तरीकों को अपनाएं, जिससे पर्यावरण और पशुधन दोनों सुरक्षित रह सकें।
साथ ही, इस पहल से गोवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि जब बैलों की खेती में जरूरत बढ़ेगी तो पशुपालन को भी नई दिशा मिलेगी।
किन जिलों से आए सबसे ज्यादा आवेदन
प्रदेश के कई जिलों से किसानों ने इस योजना में रुचि दिखाई है, लेकिन डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर जिलों से सबसे ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन क्षेत्रों में आज भी कई किसान पारंपरिक खेती पद्धति से जुड़े हुए हैं और बैलों के साथ खेती करने को अधिक सुरक्षित और लाभदायक मानते हैं।
इन्हीं जिलों में सरकार को इस योजना की सबसे अच्छी सफलता मिलने की संभावना भी दिखाई दे रही है।
बैल आधारित खेती प्रोत्साहन राशि का लाभ
इस योजना के तहत जो किसान बैलों से खेती करेंगे और सरकार द्वारा चयनित किए जाएंगे, उन्हें सालाना 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे वे अपने बैलों की देखभाल, चारा, औजार और खेती से जुड़ी अन्य जरूरतों को पूरा कर सकें।
यह सहायता किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे उन्हें खेती में अतिरिक्त खर्च का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
आवेदन प्रक्रिया: राज किसान साथी पोर्टल से रजिस्ट्रेशन
सरकार ने इस योजना का आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन रखा है, ताकि हर किसान आसानी से इसमें शामिल हो सके। इसके लिए राजस्थान सरकार के राज किसान साथी पोर्टल पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। किसान को अपनी जानकारी, जमीन का विवरण और बैलों से खेती करने की इच्छा दर्ज करनी होती है।
ऑनलाइन आवेदन के कारण पारदर्शिता बनी हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों के किसान भी मोबाइल के माध्यम से ही इस योजना से जुड़ पा रहे हैं।
कृषि विभाग बनाएगा किसानों का सत्यापित डाटाबेस
सभी आवेदनों की जांच के बाद कृषि विभाग द्वारा एक विशेष डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसमें केवल उन्हीं किसानों के नाम जोड़े जाएंगे, जो वास्तव में बैलों से खेती कर रहे हैं या करने के इच्छुक हैं। इसी डाटाबेस के आधार पर पात्र किसानों का चयन किया जाएगा और उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
सरकार का यह कदम इसलिए जरूरी है, ताकि योजना का सही लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और कोई गलत फायदा न उठा सके।
क्यों जरूरी हो गई है यह योजना
आज के समय में ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि मशीनों के चलते बैलों की उपयोगिता लगातार कम हो रही है। कई जगहों पर किसान बैल रखना ही छोड़ चुके हैं, जिससे गोवंश संरक्षण पर भी असर पड़ रहा है। इस योजना के माध्यम से सरकार न केवल खेती की एक पुरानी परंपरा को बचाना चाहती है, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था और पशुपालन व्यवस्था को भी मजबूत बनाना चाहती है।
यह पहल आने वाले समय में जैविक और प्राकृतिक खेती को एक नई दिशा दे सकती है।
किसानों के लिए नई शुरुआत
जो किसान इस योजना से जुड़ रहे हैं, उनके लिए यह एक नई शुरुआत की तरह है। अब बैलों से खेती करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा समर्थित और मान्यता प्राप्त तरीका बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में अगर यह योजना सफल होती है, तो और भी किसान इससे जुड़ेंगे और गांवों में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा
