छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण और आदिवासी महिला किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत की है, जिसका नाम है दुधारू पशु प्रदाय योजना। इस योजना का उद्देश्य है महिला किसानों की आय को बढ़ाना और उन्हें डेयरी व्यवसाय से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना। इसके अंतर्गत चयनित महिला किसानों को सिर्फ 10 प्रतिशत अंशदान पर साहीवाल नस्ल की दो-दो दुधारू गायें दी जा रही हैं।
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छत्तीसगढ़ दुधारू पशु प्रदाय योजना 2025
दुधारू पशु प्रदाय छत्तीसगढ़ के छह जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इन जिलों में कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद, सारंगढ़-बिलाईगढ़, जशपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज शामिल हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य है दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें स्वरोजगार के लिए डेयरी व्यवसाय से जोड़ना।
योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता
एक साहीवाल दुधारू गाय की पूरी लागत का वितरण इस प्रकार किया गया है:
- 50% अनुदान – राज्य सरकार द्वारा
- 40% ऋण – बैंक से
- 10% अंशदान – लाभार्थी महिला किसान द्वारा
किसान को केवल 10% राशि अपनी जेब से देनी होगी। शेष राशि सरकार और बैंक द्वारा वहन की जाएगी। किसानों को यह ऋण दूध बेचकर आसान किस्तों में चुकाने की सुविधा भी दी गई है।
गायों के साथ मिलेंगी कई मुफ्त सेवाएं
दुधारू पशु प्रदाय योजना केवल गाय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक साल तक की अनेक सुविधाएं भी शामिल हैं। सरकार गाय का बीमा करवा रही है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में किसान को नुकसान न हो। पशु स्वास्थ्य की निगरानी के लिए डॉक्टरों की टीम समय-समय पर दौरे करेगी। इसके साथ ही पोषक चारे के रूप में साइलेज और खनिज मिश्रण भी मुफ्त में दिया जाएगा। महिला किसानों को डेयरी प्रबंधन की ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि वे आधुनिक तरीकों से दूध उत्पादन कर सकें और ज्यादा लाभ कमा सकें।
साहीवाल नस्ल क्यों है खास?
साहीवाल गाय भारत की देशी नस्लों में से एक है जो कम खर्च में अधिक दूध देती है। यह नस्ल न केवल दूध उत्पादन में श्रेष्ठ है बल्कि इसकी देखरेख भी आसान होती है। यह उच्च गर्मी सहनशीलता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण छोटे किसानों के लिए एक आदर्श विकल्प बन जाती है। यही कारण है कि सरकार ने इस योजना के लिए साहीवाल नस्ल को चुना है।