यदि आप अपने वाहन के लिए NHAI FASTag का वार्षिक पास बनवाने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। साइबर ठगों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की हूबहू नकल कर फर्जी वेबसाइटें बना ली हैं। राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम के महानिदेशक श्री संजय अग्रवाल ने इस नए फिशिंग स्कैम को लेकर आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। इन नकली वेबसाइटों का डिजाइन और लोगो असली सरकारी पोर्टल जैसा होता है, जिससे लोग आसानी से धोखे में आ जाते हैं।
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गूगल सर्च के टॉप रिजल्ट में कैसे फंसते हैं लोग
साइबर अपराधी Google Ads और SEO का गलत इस्तेमाल करके अपनी फर्जी वेबसाइटों को गूगल सर्च के टॉप पर दिखा रहे हैं। कई बार यह लिंक Sponsored टैग के साथ आता है। आम तौर पर लोग पहले दिखने वाले लिंक को असली मान लेते हैं और बिना जांचे उस पर क्लिक कर देते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी गलती बन जाती है, क्योंकि उस लिंक पर मौजूद वेबसाइट पूरी तरह फर्जी होती है।
NHAI FASTag Annual Pass Scam Alert
एडवाइजरी के अनुसार ये फर्जी वेबसाइटें FASTag Annual Pass के लिए करीब 3000 रुपये का भुगतान मांगती हैं। पेमेंट के लिए एक क्यूआर कोड दिया जाता है। जैसे ही यूजर उस क्यूआर कोड को स्कैन करता है, पैसा सरकारी खाते में जाने की बजाय अपराधियों के म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस ने साफ किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं लिए जाते।
असली और नकली FASTag वेबसाइट की पहचान कैसे करें
ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए कुछ बातों पर खास ध्यान देना जरूरी है। FASTag से जुड़ा कोई भी काम केवल Rajmarg Yatra ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल के जरिए ही करें। वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें और annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध डोमेन से दूर रहें। भुगतान करते समय रिसीवर का नाम जरूर देखें। अगर किसी व्यक्ति का नाम दिखाई दे, तो तुरंत ट्रांजैक्शन रोक दें। किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अपनी बैंकिंग या UPI जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
ठगी होने पर तुरंत कहां शिकायत करें
अगर आप FASTag Annual Pass से जुड़े किसी फर्जी लिंक या वेबसाइट के कारण ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें। सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। राजस्थान में रहने वाले लोग 9256001930 या 9257510100 पर भी सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा भारत सरकार के पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
