राजस्थान सरकार ने खेती की दिशा बदलने वाला बड़ा कदम उठाया है। बजट 2025–26 में घोषित प्राकृतिक खेती योजना के तहत प्रदेश के 2.50 लाख किसानों को जोड़ा जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर खेती की लागत घटाना और मिट्टी की उर्वरता को फिर से मजबूत करना है।
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सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से किसान की आमदनी बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को भी सेहतमंद, केमिकल फ्री खाद्य उत्पाद मिलेंगे। इसी सोच के साथ इस योजना को राज्यभर में बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है।
प्रति एकड़ 4000 रुपये की सीधी सहायता, डीबीटी से मिलेगा लाभ
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले चयनित किसानों को सरकार की ओर से प्रति एकड़ 4000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और लाभ समय पर मिले।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 2.25 लाख किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 60:40 के अनुपात में बजट खर्च कर रही हैं। इसके अलावा 25 हजार किसानों का पूरा खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन कर रही है। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस योजना को लेकर कितनी गंभीर है।
क्लस्टर मॉडल के जरिए खेतों तक पहुंचेगी योजना
योजना को जमीन पर उतारने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया गया है। प्रदेश में करीब 2000 क्लस्टर बनाए गए हैं, जहां हर 50 हेक्टेयर क्षेत्र को एक यूनिट माना गया है। प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 125 किसानों को शामिल किया गया है, ताकि सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती को अपनाया जा सके।
किसानों को तकनीकी जानकारी देने के लिए उदयपुर स्थित प्राकृतिक खेती केंद्र से मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। ये प्रशिक्षक किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ खेती के हर चरण में मार्गदर्शन कर रहे हैं।
कृषि सखी बनेंगी किसानों का सहारा
प्राकृतिक खेती को आसान बनाने के लिए ‘कृषि सखी’ और सीआरपी को भी तैनात किया गया है। ये कृषि सखियां गांव-गांव जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक समझा रही हैं और जरूरत पड़ने पर खेतों में ही समाधान उपलब्ध करा रही हैं। इससे किसानों का भरोसा बढ़ रहा है और वे तेजी से इस मॉडल को अपना रहे हैं।
जैविक खाद के लिए संसाधन केंद्र, मिलेगा एक लाख रुपये का सहयोग
किसानों को जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों के लिए बाजार पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक केंद्र के लिए सरकार की ओर से एक लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। अब तक प्रदेश में 180 से अधिक ऐसे केंद्र शुरू हो चुके हैं, जहां किसान खुद खाद और जैविक दवाएं तैयार कर पा रहे हैं।
खेती और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद पहल
प्राकृतिक खेती को लेकर सरकार का यह कदम केवल खेती सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और आम लोगों की सेहत से भी जुड़ा है। रसायन मुक्त खेती से जहां जमीन की गुणवत्ता सुधरेगी, वहीं किसानों की लागत कम होकर मुनाफा बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, राजस्थान सरकार की यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और टिकाऊ कृषि मॉडल की ओर ले जाने की दिशा में एक मजबूत पहल मानी जा रही है। आने वाले समय में यह मॉडल पूरे प्रदेश की खेती की तस्वीर बदल सकता है।
